मंगलवार, 5 जून 2007

बीरबल री खोज

म्‍हारे गांव नागौर कानी आ कैबत है के बीरबल जको हो, बो नागौर जिला रे आ-र सा-र एक छोटो सो गांव भदवासी (जिप्‍सम के लिए प्रसिद) को हुया करतो हो तो आ बात जकी है बा बादशा अकबर रे जमाने री है, एक दिन बो आपरे बाग माय घूम रयो हो घूमता थकां एक जागा परकोटे कानी नीजर घालतो लारीने चालता एक सेवक न बोल्‍यो क *जा रे बो ल्‍या* बिण सिपाई री आ हिम्‍मत कोनी हुई के बादशा ने पाछो पूछे के मालक कांई ल्‍याणो है, बादशा नाराज नी हो जावे इ वास्‍ते बो तो आपरो मुण्‍डो ले-र निकळ ग्‍यो, चालतो गयो-चालतो गयो 4 मी-ना बीत ग्‍या हर गांव में जावे अर गांव रा छंटयोडा हुसियारां ने पूछे क बादशा कांई चावे है पर कोई भी बता कोनी सक्‍यो ईंया करता-करता बो सिपाई नागौर रे आरेसारे आयग्‍यो बठे का हुसियारां ने भेळा करया अर बादशा री बात उणारे आगे करदीनी एइयां करतां बिण भीड मं एक आदमी आगे आयो ओर पूछिया क भाया तूं तो इयां लागे है क आज मरसी काल मरसी थारी समस्‍या कांई है थोडो खुलर बता जणां बो बी मिनख नं बतायो क बादशा बाग मं घूम रया हा अर किले रा परकोटा खानी झांकता*झांकता बोल्‍या क जा रे ल्‍या, पण म्‍हारी आ समझ में कोनी आयी क बादशा मंगायो कांई है, बो आदमी बिण सिपाई ने साथे लेर आपरे गांव गयो गांव मं आपरे घरे गयो बीने चोखा तिमण जिमाया अर कयो क रात बासो अठे ही करले संवारे आपां बादशा री बात माथे विचार करांला

लगातार आगली पोस्‍ट मं--------

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