बुधवार, 6 जून 2007

बीरबल री खोज -2

आ कै र बो आदमी सिपाई ने पोढार जायर खुद मांचा माय पडगो पण नींद लेणी किसी हाथ मं ही इने सिपाई री निंद तो बादशा रे गिरवी पडी ही अर आज तो बिण आदमी नं भी नींद कोनी आवे ही, बो आखी रात सोचतो रयो परभाती मं जद बो सिपाई उठिया जणा सिनान-संपाडा करिया अर बीरे वास्‍ते बो आदमी दई, राबड्री, कांदा अर बाजरी री रोटि रो कलेवो लेय न आयो बिण सिपाई सोचियो क जीवडा बादशा रे सामि मरणो तो हैही ओ कलेवो कर न आपां काई लाट लेवांला आ सोच र बो सिपाई तो बिण आदमी ने हाथ जोडिया अर बोल्‍यो भया तने घणो-घणो धिनमान म्‍हारी मोत तो म्‍हारे साथे ही चालती नीजर आ री है अब म्‍हे चालूं आज्ञा दिरावो जणे बो आदमी बोल्‍यो रे भला मिनख तूं अतरी दूर आयग्‍यो ठावस राख अर कलेवो कर म्‍हे थारी अर थारे बादशा री बात सुणली अर समझली, और बो आदमी बण सिपाई ने ढाढस बंधावे जणा सिपाई कलेवा करे इतरी देर मं बो आदमी बण सिपाई रे वास्‍ते दो गधां रे माथे पकायोडी खडी देंवता थकां कयो के थारे बादशा नं ए गधा अर म्‍हे केउं जकी बात जा र केईजे क थारी जरूरत सारु समान हाजर है, सिपाई सोचियो क जीवडा कठे-कठे आपां कोनी फिरयोडा पण कठैइ कोई हामल ही कोनी भरी ही इण आदमी हामल भरी ही अर आपरा दो गधा भी इण माटी रे साथे भिजवाय रियो है जणा आगे तो भगवानी करसी ज्‍यू हुसी पण क तो बादशा शाबासी देसी नई तो मरणो तो हैइ आ सोच र बो सिपाई बण भलमाणस सं रामरमी करी अर बिदा लीनी, अर आपरे रास्‍ते चाल पडयो, अढाई मईना चाल अर बो सिपाई अकबर बादशा रा दरबार मं पौंचियो । ......

लगातार आगली पोस्‍ट मं--------

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