भायां ने म्हारा घणा मानसूं राम राम
आज म्हे आ सोची है क आप लोगां ने म्हारा जिला रे बारे में जाणकारी कराउ अर म्हारे जिले रो मान बढावण वास्ते आप लोगां ने जिले री सरकारी वेबसाईट माथे पधारो अर इण जिले री सगळी जाणकारी आप लोगां ने इंगरेजी भाषा मां मिल जासी।
रविवार, 1 जुलाई, 2007
नागौर जिला री जाणकारी
बुधवार, 20 जून, 2007
करणीमाता रा दर्शण
बोळा दिना होग्या किं लिखण रो मन बणाउ हूं पण बात नाके नी आ री है तो आज सोचियो के क्यूं कोनी आज भायां रे साथे बीकानेर जिले रे देशनोक करणीमाता रे मन्दिर रा दर्शण कर लिया जावे, इण बात ने सोच अर म्हे आज आप लोगां रे वास्ते करणीमाता रे दर्शणां री तैयारी करी हां आशा है आपरो हेत म्हारे हिवडे आवेला तो चालो करणीमाता रा दर्शण करबा चालां।
करणीमाता रो मन्दिर उन्दरा (काबा) वाळी माता रे नाम सूं पूरे संसार मं ओळखीजे, ओ मन्दिर बीकानेर सूं 30 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग 89 पर नागौर जिले खानी जावण वाळी सडक पर है, बीकानेर सूं चालां जणा 30-35 मीनटां में माताजी रा मन्दिर आ सकां हां। माताजी रा मन्दिर रा मुख दरवाजा पर एकांखानी तो एक सिंघणी अर दूजीखानी सिंघ बैठा है दूर सूं देखा जणे इंया लागे है जियां संगमरमर का भाटा मं जींवता सिंघ'-सिंघणी है, अबार हिलसी, उठ जासी, दहाडसी। इणरे बाद अब आप देखो इण मन्दिर रो मुख दरवाजो बीयां तो ओ मन्दिर एक किले री सूरत मं बण्योडो है अर इणरे मुख दरवाजे री भींत पर संगमरमर की अत्ती जबरदस्त कारीगरी है के आप जितरा गौर सूं इण भींत ने देखो ला इण संगमरमर रे भाटे माथे करियोडी कारीगरी मं नई नई बेलां, जिनावर, फूल अर पत्तियां निजरां मं आसी। अ ब आप चालो माताजी रा मन्दिर रे मांय सीधा ही निज मन्दिर माताजी री मूर्ति रे सामने आप खड्या हो माताजी रो निज मन्दिर बीना गारो लगायोडा पहाडी भाटां रो बणियोडो है ए भाटा एक माथे एक इयां ही चिणियोडा है बिण मं माताजी री मूर्ति बिराजमान है चोफेर काबा (चुहे) निजर आसी घणाई काबा दूध पी रया हे अर घणाई एक दूसरे रे लारीने भागता निजर आ जासी अरे रे डरो मति ए काबा मिनखां र माथे कोनी चढे इण काबां ने घणाई भगत आवे जका लाडू चढावे, दूध चढावे इण मन्दिर मायं इतरा काबा है के संसार रा बडा बडा विज्ञानी आ देखण ताईं आवे के इतरा काबां रे होतां इण मन्दिर मं या इण गांव मं प्लेग जेडी बीमारी क्यूं कोनी होवे है। अ ब आओ फेरी मं चालां चारां खानी काबा ई काबा निजर आवे माताजी रे फेरी देणी है तो थोडा आराम सूं आपरा पगां ने जमीन पर रगडता चालो कठई कोई काबो पगां मं आयगो तो चांदी रो काबो चढावणो पड जाव गो। इण काबां मं एक दो धोळा काबा भी है पण बे काबा तकदीरां वाळा भगतां ने ही निजर आवे जिण भगत ने धोळा काबा रा दर्शण हो जावे, आ कैबत है क बिण भगत ने माताजी रो आर्शिवाद मिल जावे अर माताजी रा मन्दिर रे गुम्बद माथे चील दिख जावे तो जाणजो थे कोई गढ जीतण री तैयारी मं जा रया हो तो थांरी जीत कोई टाळ नी सके। अ ब आपां मन्दिर सूं बारला चोक मं आया हां तो सामां डावा हाथ खानी माताजी रो रसोवडो इण रसोवडा मं दो कडाव पड्या है जकां मायं एक मं तो 40 मण सीरो अर एक मं 60 मण सीरो ए क साथ रांध सकां इतरा बडा कडाव है। इण कडावां रो काम तो साल मं एक आध वार ही पड जद कोई सेठ-साउकार माताजी री परसादी करे। इण प्रकार सूं आप करणीमाताजी रा दर्शण कर न बा र आया तो आपरी बस तैयार खडी आप न उडीक रई है। बोलो करणीमाता री जै। ल्यो अबे आप माताजी रा साक्षत् दर्शणां रो लाभ उठावो अठे आपरे कम्पुटर रो उंदरा रो डावो हाथ हिलाओ अर अंगरेजी भाषा मं लाम्बी जाणकारी भी आप नं अठेई मिल जासी दर्शण करो।
गुरुवार, 14 जून, 2007
बीरबल री खोज -4 (समापन किस्त)
(मुझे स्वयं यह लगता है कि मेरे प्रयास में कहीं कुछ कमी है लेकिन फिर भी आपसे उम्मीद करता हूं कि आप मेरा उत्साहवर्धन करते रहेंगे)
गुरुवार, 7 जून, 2007
बीरबल री खोज -3
दरबार लाग्योडो हो अकबर आपरी गदी पर बैठयो दरबारयां री बातां सुण रयो हो इतेक मं बो सिपाई अकबर नं नीजर आयो र अकबर बादशा बोल्यो रे सिपाई तुं अतरा दिनां कठै हो सिपाई बोल्यो मालकां आपरी हाजरी बजावणी ही जकी बजाय न आयो हूं आप उण दिन बाग में घूमता-घूमता बोल्या हा क जा रे ल्या म्हारी हिम्मत कोनी हुई ही क आप काई चावो हो म्हे तो चाल पडयो फिरतो'फिरतो जियां किं बण पडयो है म्हे आपरी सेवा मं अरपण करूं हू आज चावो तो म्हने मारो या तारो अती बात बोल अर चुप होयग्यो अर बादशा री सिकल देख है बादशा सोचिया क हॉ बणदिन म्हे इने कयो हो, देखां कांई ल्यायो है अर बादशा बोल्यो ल्या कांई ल्यायो है पेश कर जणे बो कांधा माथ उंचियोडो एक बोरो नीचे राखियो अर बोल्यो आ खडी(जिप्सम) है अकबर समझ गयो क जको कोई आ खडी इण सिपाई नं दीनी है बो अणुतो हुसियार अर चालबाज आदमी हो सक है।
(समय की कमी के कारण आज इतना ही लिख पाया हूं क्षमाप्रार्थी हूं।)
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बुधवार, 6 जून, 2007
बीरबल री खोज -2
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मंगलवार, 5 जून, 2007
बीरबल री खोज
म्हारे गांव नागौर कानी आ कैबत है के बीरबल जको हो, बो नागौर जिला रे आ-र सा-र एक छोटो सो गांव भदवासी (जिप्सम के लिए प्रसिद) को हुया करतो हो तो आ बात जकी है बा बादशा अकबर रे जमाने री है, एक दिन बो आपरे बाग माय घूम रयो हो घूमता थकां एक जागा परकोटे कानी नीजर घालतो लारीने चालता एक सेवक न बोल्यो क *जा रे बो ल्या* बिण सिपाई री आ हिम्मत कोनी हुई के बादशा ने पाछो पूछे के मालक कांई ल्याणो है, बादशा नाराज नी हो जावे इ वास्ते बो तो आपरो मुण्डो ले-र निकळ ग्यो, चालतो गयो-चालतो गयो 4 मी-ना बीत ग्या हर गांव में जावे अर गांव रा छंटयोडा हुसियारां ने पूछे क बादशा कांई चावे है पर कोई भी बता कोनी सक्यो ईंया करता-करता बो सिपाई नागौर रे आरेसारे आयग्यो बठे का हुसियारां ने भेळा करया अर बादशा री बात उणारे आगे करदीनी एइयां करतां बिण भीड मं एक आदमी आगे आयो ओर पूछिया क भाया तूं तो इयां लागे है क आज मरसी काल मरसी थारी समस्या कांई है थोडो खुलर बता जणां बो बी मिनख नं बतायो क बादशा बाग मं घूम रया हा अर किले रा परकोटा खानी झांकता*झांकता बोल्या क जा रे ल्या, पण म्हारी आ समझ में कोनी आयी क बादशा मंगायो कांई है, बो आदमी बिण सिपाई ने साथे लेर आपरे गांव गयो गांव मं आपरे घरे गयो बीने चोखा तिमण जिमाया अर कयो क रात बासो अठे ही करले संवारे आपां बादशा री बात माथे विचार करांला
लगातार आगली पोस्ट मं--------
मंगलवार, 29 मई, 2007
मारवाड़ी
मारवाड़ी भाषा में आप को एक कहानी प्रस्तुत कर रहा हूँ आशा है आप पसंद करेंगे -
एक बार एक कागलो हो, बो इने-बिने फिरतो-फिरतो गरमी क कारण तीसां मरण लाग्यो जणे अठिने-बठिने उडतो-उडतो पाणी कठई दिख जावे आ सोचतो-सोचतो भर गरमी मं थाकगो पण पाणी कठई नजर कोनी आयो, बो सोचण लागो क जीवङा आज तो पाणी बिना मर जांवाला, भगवान् भली करे, एक माटी को घड़ो एक पेड़ क नीचे पङ्यो नीजर आयगो, बी कागले री आंखां मं चमक आगी, अर बो तो घड़े काने उड़ान भरी अर जा बेठ्यो बी घड़े माथे अर बिमें झाँक घाली तो घड़े मं पाणी पिन्दे पङ्योङो दिख्यो अब बो सोचण लाग्यो क ई घड़े को पाणी ऊपर कियां आ सके है, बो तिकडम बिठायी अर घड़े क आरे-सारे पड्या कान्कारा एक-एक कर आपरी चांच सूं बी घड़े मं घालण लागो, थोड़ी भाँव मं पाणी ऊपर आयो जणे पाणी पियो और उडगो
